नमस्कार दोस्तों नेटवर्क मार्केटिंग या डायरेक्ट सेलिंग में काम करते समय कुछ लोगों को प्लैन दिखाने से डर लगता है, ऐसा नहीं है, प्लैन दिखाना नहीं चाहते या ऐसा भी नहीं है की उने प्लैन दिखाना आता नहीं, लेकिन उनको प्लैन दिखाने से डर लगता है और अगर दूसरे रूप में देखा जाए तो कुछ लोग बोलते हैं की पढ़े लिखे लोगों को प्लैन कैसे दिखायें? अमीर लोगों को प्लैन कैसे दिखाए? जो हमसे बड़े हैं उनको कैसे प्लैन दिखाएं?
क्या आपने कभी ऐसा सोचा है यानिकी आपको भी कभी प्लैन दिखाने से डर लगा हैं, या आपकी डाउन लाइन में कभी किसी ने आपको बोला है की मुझे प्लैन दिखाने में बड़ा डर लगता है आपकी टीम में क्या आपका ऐसा व्यक्ती है? यकीनन अगर आप नेटवर्क मार्केटिंग करते हैं तो आपने इस चीज़ का अनुभव डेफिनेटली किया होगा। ये बहुत इंट्रेस्टिंग टॉपिक है, आज इसके ऊपर बात करेंगे।
इस आर्टिकल को ध्यान से पढे और पूरा पढे, सबसे पहले मैं बताना चाहूंगा हमें डर किस चीज़ का लगता है, जब आप किसी को प्लैन दिखाने जाते हैं तो आपको लगता है की अगर प्रॉस्पेक्ट मना कर देगा तो इस चीज़ का डर लगता है या फिर प्रॉस्पेक्ट नेगेटिव हुआ तो इस चीज़ का डर लगता है या फिर उसको पहले से नेटवर्क मार्केटिंग पता हुई तो इस चीज़ का डर लगता है या फिर आपको लगता है अगर उसने मुझे कोई ऐसा वैसा सवाल पूछ लिया जिसका मेरे पास जवाब नहीं तो मैं क्या करूँगा।
तो यही कुछ चार पांच प्रकार की चीजें हैं जो हमारे दिमाग में आती है और डर पैदा करती है। तो क्या ये डर बुरी चीज़ है, दोस्तों डर तो बिल्कुल बुरी चीज़ नहीं है क्यों आप बोले की डरना नहीं चाहिए, हिम्मत रखो आगे बढ़ो डर बुरी चीज़ है, डर आप को रोकता है। लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगा की डर अच्छी चीज़ कैसे है।
अगर आपको एग्जाम में फेल होने का डर नहीं होता तो आप पूरा साल मेहनत नहीं करते और यकीनन 1 साल में फेल होते वो डर ही है जो आपको मेहनत करने के लिए मजबूर करता है और आप पास होते हैं। अगर आपको ऐक्सिडेंट का डर नहीं होता, मरने का डर नहीं होता तो आप बाइक कैसे चलाओगे? आंख बंद करके हाथ छोडके बाइक चलाओगे और आज ही ऐक्सिडेंट हो जाएगा।
दोस्तों डर हमें बचाने के लिए है, वैसे ऐसा माना जाता है साइअन्टिस्ट ये कहते है की इंसान जब जन्म लेता है तो दो प्रकार के डर के साथ जन्म लेता है एक ऊँचाई का दूसरे आवाज का बाकी सारे डर हम लोगों ने खुद मैनुफैक्चर किया है मेरे अंदर भी कुछ डर है। मैं आपके साथ आज अपने डर शेयर करना चाहता।
मुझे डर लगता है की कही में काम बन के नारे जाओ इसलिए मैं बहुत मेहनत करता हूँ। मुझे डर लगता है कि मैं अपने सपने से पीछे रह गया तो मुझे डर लगता है कि मैं अपने परिवार को वो जिंदगी नहीं दे पाया तो जिनके वो हकदार हैं। इसीलिए मैं बहुत मेहनत कर।
तो आपको यह सोचने की जरूरत है। डर दो प्रकार के हैं देखिये एक है कि मैं प्लैन दिखाना चाहता हूँ प्रॉस्पेक्ट नेगेटिव हुआ तो और दूसरा है कि मैं कामयाब नहीं हुआ तो ये भी तो एक डर है। एक है कि प्रॉस्पेक्ट ने मुझे कोई सवाल पूछ लिया तो और इस डर से अगर आप प्लैन नहीं देखा होगे तो आप यकीनन कामयाब नहीं हो पाओगे तो उसके सामने दूसरा ऑर्डर कौन सा है?
अगर मैं अपने परिवार को जिंदगी भर सपने दिखाने के बाद उनके सपने पूरे नहीं कर पाया तो अगर मैं अपने बच्चे को अच्छा एजुकेशन नहीं दे पाया तो अगर मैं अपने परिवार को उनके अधिकार उनके हक नहीं दे पाया तो अगर मैं अपनी ज़िंदगी के साथ इन्साफ नहीं नहीं कर पाया तो जभी तो डर है।
आपको सोचना है कि आप के लिए बड़ा डर कौन सा है दोस्तों, मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ, एक्चुअली दो सवाल पूछना चाहता हूँ, पहला की आप अभी तक क्या बने आज की तारीख में जब इस वीडियो को आप देख रहे है आप अभी तक क्या बने और दूसरा सवाल आप क्या बन सकते थे आपको लगता है की ये दो जगह अलग है के सर मैं ये बना, लेकिन मैं तो बहुत कुछ बन सकता था।
तो ये भी तो एक डर है कि मैं अपनी जिंदगी में जितना डेवलप हो सकता हूँ, उतना नहीं हुआ तो ये बहुत बड़ा डर है तो इस डर की वजह से हमें उन डर को खत्म करना पड़ेगा और यहाँ पे हम जिन चीजों से डरते हैं ना ऐक्चुअली उनसे डरने की जरूरत नहीं है। जैसे की लोग ना बोल देंगे तो लोग नेगेटिव होंगे तो लोग हमारी बात नहीं सुनेंगे तो उनको पहले से नेटवर्क मार्केटिंग पता होगा तो ये सब तो होने ही वाला है।
ये डेफिनेटली होगा, आपके साथ लोग आपको ना बोलेंगे। लोग आपको नेगेटिव करेंगे या नेगेटिव रिप्लाइ देंगे लोगों को नेटवर्क मार्केटिंग पता है ऐसे भी लोग आपको मिलेंगे। नेगेटिव मानसिकता वाले लोग भी आपको मिलेंगे। इससे डरने की जरूरत नहीं। यही वो चीज़ है जहाँ से आप सीखेंगे और आगे बढ़ेंगे तो आप मेंटली प्रिपेर हो जाइए। डरने का मतलब है की आप मेंटली प्रिपेर नहीं है।
आप चाहते हैं की आप जीतने भी लोगों को मिलों, हर आदमी आपके साथ जुड़ जाए तो जो भी आदमी डरता है, अगर आप डरते हैं या आपकी टीम में कोई डरता है उसको बोलिये की आपको जीत चीज़ का डर है। वो आपके साथ होने वाला है। उसे डरने की जरूरत नहीं है। आपको इस बिज़नेस को एक्सेप्ट करने की जरूरत है कि 10 लोगों को मिलेंगे तो दस में से पांच करेंगे, पांच नहीं करेगा।
देखिये ये जो दुनिया है उस दुनिया में दो प्रकार के लोग हैं पॉज़िटिव यानी की सकारात्मक मानसिकता और नकारात्मक मानसिकता दो प्रकार के लोग है हमारा काम है अपनी जैसे सोच वाले लोगों को ढूंढना हम किसी की सोच नहीं बदल सकते। हाँ लोगो की सोच बदलती है मैं मानता हूँ लेकिन हमारा वो काम नहीं है। हमारा काम है उनको मौका देना। अपने जैसे लोगों को ढूंढना जो अपना जैसा होगा वो आजायेगा नहीं होगा, वो नहीं आएगा।
इसमें डरने की कोई जरूरत नहीं लेकिन आपको मानसिक रूप से खुद को ये ताजा तैयार करने की जरूरत है की जब मैं अपने जैसे लोग ढूंढने जाऊंगा, जिनकी मानसिकता मेरे जैसी है तो उसे विपरीत मानसिकता ऑपोजिट माइंडसेट वाले लोग भी मुझे दुनिया में मिलेंगे।
तो यहाँ पे जीस चीज़ से हम डरते हैं, वो एक्चुअल में होने वाला है, उससे हमें डरने की जरूरत नहीं है, उसे एक्सेप्ट करने की जरूरत है। दोस्तों मुझे पूरी उम्मीद है यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया तो इस आर्टिकल को आपके डाउनलाईन और टीम के लोगों को शेर कीजिये।
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